
साहिबज़ादे सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के चार वीर पुत्र थे। इन्होंने धर्म, सत्य और मानवता की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। सिख इतिहास में इन्हें चार साहिबज़ादे कहा जाता है।
🔱 चार साहिबज़ादों के नाम
- साहिबज़ादा अजीत सिंह जी
- साहिबज़ादा जुझार सिंह जी
- साहिबज़ादा जोरावर सिंह जी
- साहिबज़ादा फतेह सिंह जी
⚔️ बड़े साहिबज़ादे (शहीदी – चमकौर साहिब)
🟠 साहिबज़ादा अजीत सिंह जी (जन्म: 1687)
- सबसे बड़े पुत्र
- उम्र लगभग 18 वर्ष
- 1705 में चमकौर के युद्ध में मुग़ल सेना से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए
🟠 साहिबज़ादा जुझार सिंह जी (जन्म: 1691)
- दूसरे पुत्र
- उम्र लगभग 14 वर्ष
- अपने बड़े भाई के पदचिन्हों पर चलते हुए युद्धभूमि में शहीद हुए
👉 दोनों ने कम संख्या में होते हुए भी अत्याचार के विरुद्ध साहसपूर्वक युद्ध किया।
🧱 छोटे साहिबज़ादे (शहीदी – सरहिंद)
🟡 साहिबज़ादा जोरावर सिंह जी (उम्र: 9 वर्ष)
🟡 साहिबज़ादा फतेह सिंह जी (उम्र: 7 वर्ष)
- मुग़ल सूबेदार वज़ीर ख़ान ने इन्हें इस्लाम स्वीकार करने को कहा
- इंकार करने पर 1705 में ज़िंदा दीवार में चिनवा दिया गया
- इतनी कम उम्र में भी इन्होंने धर्म नहीं छोड़ा
🌟 बलिदान का महत्व
- साहिबज़ादों का बलिदान धर्म, स्वतंत्रता और आत्मसम्मान का प्रतीक है
- यह बलिदान हमें सिखाता है कि सत्य के लिए उम्र नहीं, हौसला चाहिए
- हर साल 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है
🙏 निष्कर्ष
चारों साहिबज़ादों का जीवन और बलिदान सिख इतिहास की अमूल्य धरोहर है। इनकी शहादत आने वाली पीढ़ियों को न्याय, साहस और धर्म की रक्षा की प्रेरणा देती है।