
चौसठ योगिनी मंदिर भारत के सबसे रहस्यमय और अलौकिक शक्तियों से जुड़े प्राचीन मंदिरों में माने जाते हैं। ये मंदिर देवी शक्ति की 64 योगिनियों को समर्पित हैं, जिन्हें तांत्रिक साधना, सिद्धियों और गुप्त विद्याओं का स्रोत माना जाता है।
🔱 चौसठ योगिनियाँ कौन थीं?
- योगिनियाँ देवी दुर्गा की 64 शक्तिशाली स्वरूप मानी जाती हैं
- इनका संबंध तंत्र साधना, रहस्यमयी शक्तियों और सिद्ध योग से है
- मान्यता है कि ये योगिनियाँ रात में आकाश में विचरण करती थीं 🌙
🕉️ प्रमुख चौसठ योगिनी मंदिर
भारत में आज भी कुछ ही चौसठ योगिनी मंदिर शेष हैं:
1️⃣ मितावली (मध्य प्रदेश)
- ग्वालियर के पास स्थित
- गोलाकार संरचना, खुला आकाश
- कहा जाता है कि यहीं से संसद भवन की वास्तुकला प्रेरित है
2️⃣ भेड़ाघाट (जबलपुर)
- नर्मदा नदी के पास
- मान्यता: यहाँ तांत्रिक सिद्धियाँ शीघ्र प्राप्त होती हैं
3️⃣ हीरापुर (ओडिशा)
- सबसे छोटा पर सबसे शक्तिशाली मंदिर
- तंत्र साधकों का प्रमुख केंद्र
4️⃣ खजुराहो योगिनी मंदिर
- तांत्रिक परंपरा से जुड़ा
- गुप्त साधनाओं का स्थल
🌌 अलौकिक मान्यताएँ
- 🔮 रात में यहाँ अदृश्य शक्तियों की उपस्थिति महसूस होती है
- 🔥 अमावस्या और पूर्णिमा को विशेष ऊर्जा
- 🕯️ कहा जाता है कि योगिनियाँ आज भी साधकों की परीक्षा लेती हैं
- 🚫 पहले यहाँ सामान्य लोगों का प्रवेश वर्जित माना जाता था
🧘 तंत्र और साधना का केंद्र
- गुप्त साधनाएँ, मंत्र सिद्धि, ध्यान
- केवल योग्य साधकों को ही पूर्ण ज्ञान मिलता था
- गलत विधि से साधना करने पर विपत्ति आने की कथाएँ प्रचलित हैं
📜 ऐतिहासिक काल
- निर्माण काल: 8वीं से 10वीं शताब्दी
- पाल, कलचुरी और चंदेल वंश का संरक्षण
- ये मंदिर सामान्य मंदिरों की तरह नहीं, बल्कि खुले आकाश के नीचे बने होते थे
🔥 रहस्य जो आज भी अनसुलझे हैं
- योगिनियों की मूर्तियों में मुख्य देवी की अनुपस्थिति
- सभी मंदिरों का गोलाकार होना
- रात में पूजा निषिद्ध क्यों?
- क्या योगिनियाँ आज भी सक्रिय हैं?
🌺 निष्कर्ष
चौसठ योगिनी मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की गुप्त तांत्रिक परंपरा और अलौकिक शक्ति के प्रतीक हैं। आज भी ये मंदिर इतिहास, रहस्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से घिरे हुए हैं।