लोहड़ी: पंजाब की लोककथा और कहानी

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बहुत समय पहले की बात है, जब पंजाब की धरती पर दुल्ला भट्टी नाम का एक वीर और नेक दिल इंसान रहता था। उस दौर में अमीर ज़मींदार और मुग़ल अधिकारी गरीबों पर अत्याचार करते थे। दुल्ला भट्टी गरीबों का रक्षक था, इसलिए लोग उसे पंजाब का रॉबिन हुड भी कहते थे।

👧👦 दुल्ला भट्टी की कथा

कहा जाता है कि एक बार सुंदरी और मुंदरी नाम की दो गरीब लड़कियों को जबरन ले जाया जा रहा था। दुल्ला भट्टी ने उन्हें बचाया और अपनी बेटी की तरह उनकी इज्ज़त से शादी करवाई। उसने उनकी शादी में कन्यादान किया और आग को साक्षी मानकर विवाह संपन्न कराया।
आज भी लोहड़ी के गीतों में लोग गाते हैं—
“सुंदर मुंदरिये हो! तेरा कौन विचारा हो?
दुल्ला भट्टी वाला हो!”

🔥 लोहड़ी की आग का रहस्य

लोहड़ी की रात लोग अलाव जलाते हैं। यह आग सूर्य, जीवन और नई शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है। लोग इसमें तिल, गुड़, मूंगफली, रेवड़ी अर्पित करते हैं और कहते हैं—
“आदर आए, दलिदर जाए”
यानी घर में खुशहाली आए और गरीबी दूर जाए।

🌾 फसल और सूर्य से जुड़ी कहानी

लोहड़ी रबी फसल की बुवाई पूरी होने और गेहूं की अच्छी पैदावार की उम्मीद का त्योहार है। यह समय होता है जब सूर्य उत्तरायण की ओर बढ़ता है। इसलिए किसान इस दिन प्रकृति और सूर्य देव का धन्यवाद करते हैं।

👶 पहली लोहड़ी की परंपरा

पंजाब में अगर घर में नवविवाहित जोड़ा या नवजात शिशु हो, तो उसकी पहली लोहड़ी खास खुशी के साथ मनाई जाती है। यह जीवन में समृद्धि और शुभता का आशीर्वाद माना जाता है।

🌟 निष्कर्ष

लोहड़ी सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि पंजाब की आत्मा, उसकी वीरता, करुणा, फसल और लोकसंस्कृति की कहानी है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि खुशियाँ बाँटने से बढ़ती हैं और परंपराएँ हमें हमारी जड़ों से जोड़ती हैं।

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