21 दिसंबर – गुरु साहिब का परिवार सरसा नदी के किनारे (इतिहास)

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21 दिसंबर 1705 सिख इतिहास का अत्यंत दुखद और वीरता से भरा दिन है। इसी दिन श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का परिवार सरसा (सरस्वती) नदी के किनारे बिछुड़ गया था।

📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • आनंदपुर साहिब छोड़ते समय मुग़ल फौज और पहाड़ी राजाओं ने गुरु जी का पीछा किया।
  • उस समय सरसा नदी उफान पर थी—ठंड, अंधेरा और अफरा-तफरी का माहौल था।
  • नदी पार करते समय गुरु परिवार अलग-अलग दिशाओं में बिछुड़ गया

👨‍👩‍👦‍👦 परिवार का बिछुड़ना

  • माता गुजरी जी अपने दो छोटे साहिबज़ादों
    साहिबज़ादा जोरावर सिंह (9 वर्ष) और
    साहिबज़ादा फतेह सिंह (7 वर्ष) के साथ अलग हो गईं।
  • उन्हें बाद में गंगू ब्राह्मण ने धोखे से पकड़वा दिया।
  • आगे चलकर सरहिंद में दोनों छोटे साहिबज़ादों को दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया और माता गुजरी जी ने भी वहीं शहादत पाई।

⚔️ गुरु गोबिंद सिंह जी

  • गुरु जी अपने दो बड़े साहिबज़ादों
    साहिबज़ादा अजीत सिंह और साहिबज़ादा जुझार सिंह के साथ रहे।
  • बाद में चमकौर साहिब में दोनों बड़े साहिबज़ादों ने वीरगति (शहादत) प्राप्त की।

🌟 महत्व

  • यह घटना त्याग, धैर्य और धर्म की रक्षा का सर्वोच्च उदाहरण है।
  • सिख इतिहास में इसे परिवारिक बलिदान की सबसे महान गाथा माना जाता है।

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