उत्पन्ना एकादशी की पौराणिक कथा

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पद्म पुराण के अनुसार बहुत समय पहले मुर दैत्य (मुरासुर) नाम का एक अत्यंत बलवान और क्रूर राक्षस था। उसने देवताओं को पराजित कर दिया था। सभी देवता उसकी अत्याचारों से परेशान होकर भगवान विष्णु के पास गए।

एक बार जब भगवान विष्णु हिमावती नामक गुफा में विश्राम कर रहे थे, तभी मुरासुर ने उन पर हमला करने की कोशिश की। उसी समय भगवान विष्णु के शरीर से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई — एक अद्भुत तेजस्वी देवी।

इस देवी ने मुरासुर से युद्ध किया और उसे वध कर दिया।

भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर उस देवी से कहा कि—

✔ तुमने दुष्ट मुर का संहार किया है
✔ इसलिए तुम्हारा नाम एकादशी होगा
✔ और तुम्हारी उपासना करने वाले सभी भक्त पापों से मुक्त होंगे

चूंकि यह देवी पहली बार प्रकट हुई थी, इसलिए इसे उत्पन्ना एकादशी कहा गया।

  • ‘उत्पन्ना’ का अर्थ है — जन्मी हुई / प्रकट हुई
  • इसलिए यह दिन — एकादशी देवी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है।

उत्पन्ना एकादशी का महत्व

  • यह सभी एकादशियों की मूल मानी जाती है।
  • इस दिन का व्रत करने से पापों का नाश होता है।
  • जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
  • यह एकादशी देवी की उत्पत्ति तिथि होने के कारण अत्यंत विशेष है।
  • इसे एकादशी व्रत शुरू करने के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

आध्यात्मिक लाभ

  • मानसिक शांति
  • नकारात्मक ऊर्जा का नाश
  • पापों से मुक्ति
  • भगवान विष्णु की विशेष कृपा
  • आध्यात्मिक उन्नति

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