
1️⃣ गुरु नानक देव जी (1469–1539)
सिख धर्म के संस्थापक।
उन्होंने कहा—
“ना कोई हिंदू, ना मुसलमान — सब एक ही परमेश्वर की संतान हैं।”
उन्होंने 3 सिद्धांत दिए:
- नाम जपना (ईश्वर का स्मरण)
- किरत करना (ईमानदारी से काम)
- वंड छकना (सबके साथ बाँटकर खाना)
2️⃣ गुरु अंगद देव जी (1539–1552)
- गुरु नानक देव जी के उपदेशों को आगे बढ़ाया।
- गुरमुखी लिपि को विकसित करके आम लोगों के लिए पढ़ना आसान बनाया।
3️⃣ गुरु अमर दास जी (1552–1574)
- लंगर की परंपरा को मजबूत बनाया—सब लोग एक साथ बैठकर खाना खाएँ।
- जाति-पांति के भेद को खत्म किया।
4️⃣ गुरु राम दास जी (1574–1581)
- अमृतसर शहर की नींव रखी।
- लंगर और सेवा की भावना को बढ़ावा दिया।
5️⃣ गुरु अर्जन देव जी (1581–1606)
- आदि ग्रंथ (गुरु ग्रंथ साहिब) का संकलन किया।
- शांत और विनम्र स्वभाव के कारण भारत के पहले ‘शहीद गुरु’ बने।
6️⃣ गुरु हरगोबिंद जी (1606–1644)
- मीरी–पीरी का सिद्धांत दिया—
आध्यात्मिकता + साहस - सिखों को आत्मरक्षा सिखाई।
7️⃣ गुरु हर राय जी (1644–1661)
- दयालु, करुणामय और प्रकृति प्रेमी गुरु।
- मुफ्त औषधालय चलाया।
8️⃣ गुरु हरकृष्ण जी (1661–1664)
- सबसे कम उम्र के गुरु।
- चेचक महामारी में लोगों की सेवा करते-करते मात्र 8 वर्ष की उम्र में शहीद हो गए।
- दिल्ली में उनका प्रसिद्ध गुरुद्वारा है: बंगला साहिब।
9️⃣ गुरु तेग बहादुर जी (1664–1675)
- “हिंद की चादर” कहलाते हैं।
- कश्मीरी पंडितों और धर्म की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
- उनका बलिदान मानवता की रक्षा के लिए था, किसी धर्म के लिए नहीं।
🔟 गुरु गोबिंद सिंह जी (1675–1708)
- खालसा पंथ की स्थापना (1699)।
- 5 ककार की मर्यादा दी।
- अपने चारों पुत्रों का बलिदान दिया।
- जाते-जाते घोषणा की—
“अब गुरु ग्रंथ साहिब ही सिखों का सदा जीवित गुरु होगा।”
🌟 सिख गुरुओं का मुख्य संदेश
- ईश्वर एक है
- सब मनुष्य समान हैं
- सेवा सबसे बड़ी पूजा है
- अन्याय के विरुद्ध खड़े रहो
- मेहनत करो और बाँटकर खाओ
“बहुत ही सुंदर और जानकारीपूर्ण पोस्ट! सिख गुरुओं का त्याग, सेवा और मानवता का संदेश हमें आज भी प्रेरणा देता है। 🙏✨”