22 दिसंबर – चमकौर साहिब की जंग में बाबा अजीत सिंह जी और बाबा जुझार सिंह जी की शहादत (इतिहास)

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22 दिसंबर 1704 सिख इतिहास का सबसे वीर और बलिदान से भरा दिन है। इसी दिन चमकौर साहिब दी जंग में दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के बड़े साहिबज़ादे बाबा अजीत सिंह जी और बाबा जुझार सिंह जी ने अद्भुत वीरता दिखाते हुए शहादत प्राप्त की।


🔶 जंग की पृष्ठभूमि

  • आनंदपुर साहिब छोड़ने के बाद गुरु साहिब अपने परिवार और सिंहों के साथ चमकौर पहुँचे।
  • मुग़ल फौज और पहाड़ी राजाओं की संयुक्त सेना (हजारों की संख्या में) ने गुरु साहिब को घेर लिया।
  • गुरु साहिब के साथ केवल 40 के करीब सिंह थे, जो एक कच्चे किले (गढ़ी) में डट गए।

⚔️ बाबा अजीत सिंह जी की शहादत

  • उम्र: लगभग 18 वर्ष
  • बाबा अजीत सिंह जी गुरु साहिब के सबसे बड़े पुत्र थे।
  • उन्होंने गुरु साहिब से अनुमति लेकर मुग़ल सेना पर हमला किया।
  • बहुत कम संख्या में होते हुए भी उन्होंने दुश्मनों को भारी नुकसान पहुँचाया।
  • अंततः वीरता से लड़ते हुए धर्म और सच्चाई की रक्षा करते हुए शहीद हो गए।

⚔️ बाबा जुझार सिंह जी की शहादत

  • उम्र: लगभग 14 वर्ष
  • बड़े भाई की शहादत के बाद बाबा जुझार सिंह जी ने भी युद्ध में जाने की इच्छा प्रकट की।
  • इतनी कम उम्र में उन्होंने असाधारण साहस दिखाया।
  • वे शेर की तरह दुश्मनों पर टूट पड़े और कई सैनिकों को ढेर किया।
  • अंत में वे भी खालसा पंथ की आन-बान-शान के लिए शहीद हो गए।

🕊️ ऐतिहासिक महत्व

  • दोनों साहिबज़ादों की शहादत ने सिख इतिहास में अमर बलिदान की मिसाल कायम की।
  • गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने पुत्रों को नहीं रोका, क्योंकि उनके लिए धर्म सबसे ऊपर था।
  • चमकौर की जंग ने यह सिद्ध कर दिया कि सच्चाई और साहस संख्या के मोहताज नहीं होते

🙏 निष्कर्ष

22 दिसंबर का दिन सिखों के लिए शौर्य, बलिदान और प्रेरणा का प्रतीक है।
बाबा अजीत सिंह जी और बाबा जुझार सिंह जी की शहादत आने वाली पीढ़ियों को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देती रहेगी।

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