
धारी देवी मंदिर उत्तराखंड के श्रीनगर (गढ़वाल) के पास अलकनंदा नदी के बीचों-बीच एक चट्टान पर स्थित है। यह मंदिर माँ काली (धारी देवी) को समर्पित है और गढ़वाल क्षेत्र की रक्षक देवी मानी जाती हैं।
🕉️ धारी देवी का इतिहास
- मान्यता है कि धारी देवी की पूजा सदियों से होती आ रही है।
- यह देवी गढ़वाल की इष्ट देवी हैं और माना जाता है कि माँ पूरे क्षेत्र की रक्षा करती हैं।
- पुराने समय में राजा-महाराजा युद्ध या संकट से पहले यहाँ आशीर्वाद लेने आते थे।
- मंदिर का स्थान कभी स्थिर नहीं रहा, बल्कि नदी के बीच प्राकृतिक चट्टान पर स्थापित रहा।
🔮 धारी देवी के रहस्य
1️⃣ अधूरी मूर्ति का रहस्य
- माँ धारी देवी की मूर्ति कमर से ऊपर ही स्थापित है।
- कहा जाता है कि मूर्ति का निचला भाग पाताल लोक में है।
- मान्यता है कि मूर्ति को पूरा करने से भयंकर आपदा आ सकती है।
2️⃣ रूप बदलने का चमत्कार
- भक्तों का विश्वास है कि माँ का स्वरूप सुबह कन्या,
दोपहर युवा, और
शाम को वृद्धा का रूप धारण करता है।
3️⃣ 2013 की केदारनाथ आपदा से जुड़ा रहस्य
- 2012 में मंदिर को सड़क निर्माण के कारण ऊँचाई पर स्थानांतरित किया गया।
- इसके ठीक बाद 2013 की भीषण केदारनाथ त्रासदी हुई।
- लोग मानते हैं कि यह माँ के क्रोधित होने का संकेत था।
4️⃣ रात में पूजा नहीं होती
- सूर्यास्त के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
- मान्यता है कि रात में देवी स्वयं विचरण करती हैं।
🌊 अलकनंदा नदी से संबंध
- मंदिर के नीचे बहती अलकनंदा नदी को माँ का चरणामृत माना जाता है।
- नदी का प्रवाह कभी भी मूर्ति को नुकसान नहीं पहुँचाता—यह भी एक रहस्य माना जाता है।
🙏 भक्तों की आस्था
- माना जाता है कि सच्चे मन से माँ से माँगा गया हर वरदान पूरा होता है।
- गढ़वाल में कोई भी शुभ कार्य माँ धारी देवी की अनुमति के बिना अधूरा माना जाता है।
🔔 निष्कर्ष
धारी देवी सिर्फ एक मंदिर नहीं बल्कि आस्था, रहस्य और शक्ति का प्रतीक हैं।
यह स्थान आज भी लोगों के लिए चमत्कार और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।