
लोहड़ी उत्तर भारत, खासकर पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश का प्रमुख लोक-त्योहार है। यह हर साल 13 जनवरी को मनाया जाता है। इसे मनाने के पीछे कई कारण और मान्यताएँ हैं:
🌾 1. फसल की खुशी
लोहड़ी रबी फसल (गेहूं) की अच्छी पैदावार की खुशी में मनाई जाती है। किसान भगवान का धन्यवाद करते हैं और नई फसल के स्वागत में उत्सव मनाते हैं।
🔥 2. अग्नि पूजा
लोहड़ी की रात अलाव जलाया जाता है, जिसकी परिक्रमा कर लोग तिल, गुड़, मूंगफली, रेवड़ी आदि अर्पित करते हैं। आग को ऊर्जा, शुद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
☀️ 3. सूर्य उत्तरायण
लोहड़ी के बाद सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है (उत्तरायण)। यह ठंड के अंत और गर्मी की शुरुआत का संकेत है, इसलिए इसे शुभ माना जाता है।
👶 4. नई शादी या बच्चे की पहली लोहड़ी
घर में नई शादी या नवजात शिशु हो तो पहली लोहड़ी खास धूमधाम से मनाई जाती है। यह सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है।
🦁 5. दुल्ला भट्टी की कथा
लोककथा के अनुसार दुल्ला भट्टी गरीबों की मदद करता था और बेटियों की शादी कराता था। लोहड़ी के गीतों में आज भी उसका नाम लिया जाता है।
🎶 6. लोक संस्कृति और मेल-जोल
भांगड़ा-गिद्धा, लोकगीत, नाच-गाना और सामूहिक उत्सव लोहड़ी को सामुदायिक एकता का त्योहार बनाते हैं।
संक्षेप में:
लोहड़ी फसल, सूर्य, अग्नि, खुशहाली और नई शुरुआत का उत्सव है। 🔥🌾