
वुल्फ मून सुपरमून दो शब्दों से मिलकर बना है — वुल्फ मून और सुपरमून। इसका इतिहास प्राचीन सभ्यताओं और खगोलीय घटनाओं से जुड़ा हुआ है।
🐺 वुल्फ मून का इतिहास
- वुल्फ मून जनवरी महीने की पूर्णिमा को कहा जाता है।
- यह नाम सबसे पहले नेटिव अमेरिकन (मूल अमेरिकी) जनजातियों द्वारा दिया गया।
- कड़ाके की सर्दी के कारण जंगलों में भोजन की कमी हो जाती थी।
- इस समय भेड़िये (Wolves) गाँवों के पास आकर ज़ोर-ज़ोर से हूंकते (howling) थे।
- इन्हीं आवाज़ों के कारण जनवरी की पूर्णिमा को वुल्फ मून कहा जाने लगा।
- यह चंद्रमा संघर्ष, धैर्य और जीवित रहने की शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
🌕 सुपरमून का इतिहास
- जब चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी के सबसे नज़दीक होता है और उसी समय पूर्णिमा होती है, तब उसे सुपरमून कहा जाता है।
- इस स्थिति को खगोल विज्ञान में पेरिजी (Perigee) कहते हैं।
- “सुपरमून” शब्द को 1979 में ज्योतिषी रिचर्ड नॉले (Richard Nolle) ने लोकप्रिय बनाया।
- सुपरमून सामान्य पूर्णिमा से:
- लगभग 14% बड़ा
- और 30% अधिक चमकीला दिखाई देता है।
🌕 वुल्फ मून सुपरमून का महत्व
- जब जनवरी की पूर्णिमा सुपरमून होती है, तब उसे वुल्फ मून सुपरमून कहा जाता है।
- इसे वर्ष की शुरुआत में:
- आत्मबल
- नई शुरुआत
- नकारात्मकता को त्यागने का समय माना जाता है।
- कई संस्कृतियों में इसे आत्म-चिंतन और आत्म-संरक्षण से जोड़ा जाता है।
📜 अन्य प्रचलित नाम
- यूरोप में: आइस मून (Ice Moon)
- कुछ क्षेत्रों में: ओल्ड मून (Old Moon)
✨ रोचक तथ्य
- सुपरमून के समय समुद्र में ऊँची ज्वार (High Tides) आती हैं।
- साफ मौसम में यह चंद्रमा आँखों से देखने पर बहुत विशाल और आकर्षक लगता है।